September 4, 2026
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खान सर के कोचिंग पर हमला: सस्ती पढ़ाई और महंगी दुश्मनी की कहानी

September 3, 2026 • Sarita Pandey

खान सर की कोचिंग पर हुए हमले के पीछे एक बहुत पुरानी दुश्मनी छिपी है — कोचिंग संस्थानों की दुश्मनी.

2 जून 2026 की रात करीब 10 बजे. पटना के मुसल्लहपुर हाट में खान सर के कोचिंग सेंटर में ऑनलाइन बैच चल रहे थे. तभी बाहर से 15 से 20 लोगों की एक भीड़ आई. उन्होंने कोचिंग का गेट तोड़ने की कोशिश की. परिसर में घुसकर तोड़फोड़ की. कोचिंग के बैनर नोच दिए. जो सुरक्षा गार्ड वहां तैनात था, उस पर हमला किया और उसका सिर फोड़ दिया.

पुलिस की जांच में जो बात सामने आई वो ये थी कि जो लोग वहां आए थे, उनका संबंध एक दूसरे कोचिंग संस्थान ज्ञान बिंदु से था. CCTV फुटेज में गोलीबारी के कोई सबूत नहीं मिले. हालांकि पुलिस ने यह ज़रूर कहा कि ज्ञानबिंदु कोचिंग के डायरेक्टर के इशारे पर उनके स्टाफ और कुछ लोगों ने ये घटना अंजाम दी.

 

ज्ञान बिंदु पटना का एक कोचिंग संस्थान है जो मुसल्लहपुर हाट इलाके में ही है — खान सर के कोचिंग के एकदम करीब. जब से खान सर का संस्थान इस इलाके में बड़ा हुआ, वहां छात्रों की भीड़ बढ़ी, और उसी अनुपात में दूसरे कोचिंग संस्थानों के छात्र कम होने लगे.

मुसल्लहपुर हाट पटना का एक बड़ा एजुकेशन हब है. यहां दर्जनों कोचिंग संस्थान हैं. सालों से यहां के कोचिंग संस्थान महंगी फीस वसूलते आए हैं. जब खान सर यहां आए और उन्होंने कम फीस में पढ़ाना शुरू किया, तो पहले तो किसी ने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया. लेकिन जैसे-जैसे उनके नतीजे आने लगे, हज़ारों बच्चों का सरकारी नौकरियों में सिलेक्शन होने लगा, उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई.

घटना से कुछ समय पहले बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा का रिजल्ट आया था जिसमें खान सर के संस्थान से हज़ारों बच्चे सिलेक्ट हुए थे. खान सर के मुताबिक यही वो ट्रिगर था जिसने हमले को अंजाम दिलाया.

खान सर ने मीडिया के सामने साफ कहा — मुख्य मुद्दा ये है कि हम इतनी कम फीस में क्यों पढ़ा रहे हैं. उनका कहना है कि कुछ लोग शिक्षक का चोला पहनकर इस क्षेत्र में व्यापार करने आए हैं.

ये मामला सिर्फ खान सर का नहीं है. ये उन लाखों बच्चों का मामला है जो इस देश में पैसे की कमी की वजह से अच्छी शिक्षा से वंचित रहते हैं. और जो उन्हें वो शिक्षा देने की कोशिश करता है, उसे धमकियां मिलती हैं, उस पर हमले होते हैं. सवाल सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं — बल्कि ये है कि हम किस तरह की शिक्षा व्यवस्था चाहते हैं.

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